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मैं परिंदों की तरह..

मैं परिंदों की तरह आस्मा में उड़ता था आठों पहर तेरे ख़यालों में डूबा रहता था मुझपे इतनी तो इनायत की सनम तुमने मुस्कुराती थी जब तुमको सनम कहता था तू जो खोयी तो ये सारा जहां वीरान हुआ अब वो जोगी हुआ जो कल तेरा दीवाना था मैं तो टुकड़ों को जोड़ता हूँ कि तुझे देखूँ तू ही तस्वीर थी और दिल मेरा आईना था..